गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, फर्जी कॉल सेंटर से 1400 विदेशियों को बनाया शिकार

Team The420
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गोरखपुर | उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, हांगकांग और लेबनान में रहने वाले लोगों से ठगी करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह पर करीब 1400 विदेशी नागरिकों को ठगने का आरोप है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह रैकेट चिलुआताल थाना क्षेत्र के करीमनगर इलाके में स्थित एक तीन मंजिला रिहायशी इमारत से संचालित किया जा रहा था। बीते छह महीनों से यह फर्जी कॉल सेंटर रात के समय सक्रिय रहता था। शाम सात बजे से सुबह चार बजे तक कॉलिंग की जाती थी, ताकि पश्चिमी देशों के समय के अनुसार पीड़ितों से संपर्क किया जा सके।

छापेमारी में डिजिटल सबूतों का जखीरा

पुलिस की छापेमारी के दौरान कॉल सेंटर से 28 लैपटॉप, 37 हेडफोन, दो राउटर, कई मोबाइल फोन, कॉलिंग स्क्रिप्ट, ई-मेल डेटा और अन्य अहम डिजिटल दस्तावेज बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि इन्हीं उपकरणों के जरिए कॉलिंग, डेटा प्रबंधन और ठगी की पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही थी।

फर्जी पहचान, भरोसेमंद स्क्रिप्ट

पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के सदस्य खुद को विदेशी संस्थानों का प्रतिनिधि बताकर फोन करते थे। कॉल करने वाले आरोपी ‘जॉन’ और ‘जॉर्ज लुईस’ जैसे फर्जी अमेरिकी नामों का इस्तेमाल करते थे, ताकि सामने वाला व्यक्ति आसानी से उन पर भरोसा कर ले। पीड़ितों को स्वास्थ्य बीमा, टैक्स रिफंड या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा दिया जाता था।

जब कोई व्यक्ति बातचीत में फंस जाता था, तो कॉल को गिरोह के वरिष्ठ सदस्य के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था। इसके बाद बैंकिंग प्रक्रिया, प्रोसेसिंग फीस या दस्तावेजी औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ित से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी। पूरी बातचीत पहले से तैयार स्क्रिप्ट के अनुसार होती थी, जिससे कॉल पेशेवर और विश्वसनीय लगे।

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कई राज्यों से जुड़े आरोपी, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच

गिरफ्तार आरोपियों में पश्चिम बंगाल के कोलकाता और उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बलरामपुर व गोरखपुर के निवासी शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि अलग-अलग राज्यों के लोगों को शामिल करने से गिरोह लंबे समय तक बिना शक के सक्रिय रह सका।

प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्क होने के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अब जब्त डिजिटल डेटा का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह के पीछे विदेश में बैठा कोई मास्टरमाइंड या फंड रिसीवर तो नहीं है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल अन्य साइबर ठगी मामलों में किया गया।

जांच जारी, और गिरफ्तारियों की संभावना

पुलिस के अनुसार, जांच अभी जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। तकनीकी निगरानी के जरिए संदिग्धों को ट्रेस किया जा रहा है और विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही यह आकलन किया जा रहा है कि कुल कितनी रकम की ठगी की गई।

यह मामला दिखाता है कि किस तरह रिहायशी इलाकों में सामान्य दिखने वाले मकानों से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस इमारत से कॉल सेंटर चल रहा था, वह एक सामान्य आवास की तरह ही प्रतीत होती थी और किसी को संदेह नहीं हुआ।

पुलिस ने विशेष रूप से विदेशों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि बीमा, टैक्स रिफंड या अचानक आर्थिक लाभ का लालच देने वाले अनजान कॉल्स से सावधान रहें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी वास्तविक सरकारी या बीमा एजेंसी फोन पर भुगतान या बैंक विवरण नहीं मांगती।

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