नई दिल्ली | दिल्ली-एनसीआर में केवाईसी अपडेट के नाम पर की जा रही साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। बैंक अधिकारी बनकर लोगों को डराने, फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल फोन हैक करने और फिर खातों से लाखों रुपये निकालने वाले इस गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इस तरीके से कम से कम ₹8.30 लाख की ठगी की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह जामताड़ा–पश्चिम बंगाल क्षेत्र से जुड़े साइबर अपराध के स्थापित पैटर्न पर काम कर रहा था। आरोपी खुद को निजी बैंक का अधिकारी बताकर व्हाट्सऐप और एसएमएस के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और दावा करते थे कि यदि तुरंत केवाईसी अपडेट नहीं की गई तो बैंक खाता बंद कर दिया जाएगा। जल्दबाजी और डर के माहौल में पीड़ितों को फर्जी लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाया जाता था।
एक क्लिक, पूरा फोन उनके कब्जे में
सागरपुर इलाके की एक महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 12 दिसंबर 2025 को उनके व्हाट्सऐप पर केवाईसी अपडेट से जुड़ा संदेश आया था। संदेश में चेतावनी दी गई थी कि प्रक्रिया पूरी न करने पर उनका बैंक खाता बंद हो जाएगा। इसके बाद उन्हें एक एपीके फाइल भेजी गई और उस पर क्लिक कर जानकारी भरने के लिए कहा गया।
जैसे ही पीड़िता ने लिंक पर क्लिक किया, उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। आरोपियों ने फोन में मौजूद बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर उनके नाम पर लोन के लिए आवेदन कर दिया। 15 दिसंबर को बैंक से ट्रांजैक्शन से जुड़े संदेश आने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। जांच में सामने आया कि इस दौरान कुल ₹8.30 लाख की रकम उनके खाते से निकाल ली गई थी।
तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंच
शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, बैंक डिटेल्स और मोबाइल डेटा का विश्लेषण शुरू किया। जांच में पता चला कि आरोपी दिल्ली से बाहर सक्रिय थे और झारखंड के धनबाद क्षेत्र में खेतों के बीच बने अस्थायी ठिकानों से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे।
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छापेमारी के दौरान तीन आरोपियों—शिव कुमार रविदास, संजय रविदास और दिनेश रविदास—को मौके से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद चौथे आरोपी शुभम कुमार बरनवाल को पश्चिम बंगाल के हुगली से पकड़ा गया।
डिजिटल सबूतों का जखीरा
आरोपियों के पास से दस मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, ट्रांजैक्शन मैसेज, एक्सेल शीट, बैंक डिटेल्स, एपीके फाइलें और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी खुद को एक्सिस बैंक का अधिकारी बताकर कॉल और मैसेज करते थे। फर्जी एपीके फाइल इंस्टॉल करवाकर वे मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे।
इसके बाद बैंकिंग ऐप्स के जरिए लोन की रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर की जाती थी और एटीएम व पीओएस मशीनों के माध्यम से नकदी निकाल ली जाती थी।
साधारण पृष्ठभूमि, संगठित अपराध
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। कुछ आरोपी 10वीं और 12वीं पास हैं और मजदूरी या छोटे-मोटे काम करते थे, जबकि एक आरोपी मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था। पुलिस का मानना है कि कम पढ़े-लिखे युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर इस साइबर ठगी नेटवर्क से जोड़ा गया।
फिलहाल पुलिस आरोपियों के बैंक खातों, मनी ट्रेल और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है। आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से सतर्क रहें। किसी भी बैंक या सरकारी संस्था द्वारा फोन या लिंक के जरिए निजी जानकारी या भुगतान नहीं मांगा जाता। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
