हैदराबाद पुलिस ने अंडाणु दान के नाम पर महिलाओं को दूसरे राज्यों से बुलाकर कथित रूप से उनका शोषण करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर 43 महिलाओं को सुरक्षित निकाला गया। पुलिस फर्जी दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और फर्टिलिटी केंद्रों की भूमिका की जांच कर रही है।

हैदराबाद: अंडाणु बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़, आठ गिरफ्तार; यूपी-बंगाल समेत कई राज्यों की 43 महिलाएं बचाई गईं

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By Roopa
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हैदराबाद में अंडाणु (एग) दान के नाम पर महिलाओं को दूसरे राज्यों से बुलाकर उनका इस्तेमाल करने वाले एक कथित अंतरराज्यीय रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर विभिन्न ठिकानों से 43 महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला है। बचाई गई महिलाओं को उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से लाया गया था।

छापेमारी और पुलिस कार्रवाई

बेगमपेट और सरूरनगर पुलिस ने मल्काजगिरि पुलिस कमिश्नरेट की स्पेशल ऑपरेशंस टीम के साथ मिलकर दोनों कमिश्नरेट क्षेत्रों में स्थित चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह पूरी कानूनी कार्रवाई मल्काजगिरि पुलिस आयुक्त बी. सुमति की सीधी निगरानी में अंजाम दी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बेगमपेट और सरूरनगर थानों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 (ART Act, 2021) की संबंधित धाराओं के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

रैकेट का मॉडस ऑपरेंडी (कामकाज का तरीका)

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था:

* पहचान और भर्ती: नेटवर्क के एजेंट और बिचौलिए अलग-अलग राज्यों में गरीब व जरूरतमंद महिलाओं की पहचान करते थे।

* पैसों का लालच: महिलाओं को अंडाणु दान के एक चक्र (साइकिल) के बदले ₹20,000 से ₹30,000 देने का प्रलोभन दिया जाता था।

* ठहराव व प्रक्रिया: महिलाओं को हैदराबाद लाकर किराए के मकानों में ठहराया जाता था। इसके बाद उन्हें आईवीएफ (IVF) और फर्टिलिटी केंद्रों पर ले जाया जाता, जहां अंडाशय को सक्रिय करने के लिए हार्मोन के इंजेक्शन और दवाएं दी जाती थीं, ताकि अंडाणु निकालने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

मुख्य आरोपी और नेटवर्क की भूमिका

* अमित शर्मा (44 वर्ष): मध्य प्रदेश के इंदौर का रहने वाला और वर्तमान में हैदराबाद निवासी अमित शर्मा दोनों मामलों का मुख्य आयोजक (मास्टरमाइंड) माना जा रहा है।

* निक्कत परवीन (31 वर्ष): कोलकाता निवासी निक्कत परवीन पर सह-आयोजक होने और विभिन्न राज्यों से महिलाओं की भर्ती करने का आरोप है।

* अन्य गिरफ्तारियां: पकड़े गए बाकी लोगों में एक आईवीएफ एजेंट और कई समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) शामिल हैं।

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दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और मेडिकल जांच

छापेमारी के दौरान पुलिस ने महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री जब्त की है।

* पुलिस को आशंका है कि महिलाओं की पहचान छिपाने और भर्ती प्रक्रिया के लिए आधार कार्ड व अन्य दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया हो सकता है।

* आयोजकों और बिचौलियों के बैंक खातों व वित्तीय लेन-देन की भी गहनता से जांच की जा रही है।

* इस बात की भी जांच चल रही है कि संबंधित फर्टिलिटी केंद्रों और एआरटी (ART) बैंकों ने सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कानूनी मानकों और नियमों का पालन किया था या नहीं।

शोषण और मानव तस्करी के एंगल से पड़ताल

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या महिलाओं को इस पूरी मेडिकल प्रक्रिया के जोखिमों की जानकारी दी गई थी या उन्हें धोखे, दबाव, जबरदस्ती अथवा मानव तस्करी के जरिए इस काम में धकेला गया। महिलाओं के बयान दर्ज करने के साथ ही उनकी मेडिकल हिस्ट्री और इलाज से जुड़े तमाम रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे चिकित्सा प्रक्रियाओं, नौकरी या फर्टिलिटी सेवाओं के नाम पर महिलाओं की किसी भी संदिग्ध आवाजाही, भर्ती या ठहराव की सूचना मिलने पर सतर्क रहें और फर्टिलिटी केंद्रों में जाने वाले लोग भी इससे जुड़े कानूनी नियमों का पूरा ध्यान रखें।

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