नोएडा। कर्मचारियों के वेतन भुगतान के नाम पर 32 लाख रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि लखनऊ की एक मैनपावर कंपनी ने 63 कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन भेजने के लिए नोएडा की एक कंपनी को रकम ट्रांसफर की थी, लेकिन संबंधित कंपनी ने न तो कर्मचारियों को भुगतान किया और न ही रकम वापस लौटाई। इस मामले में नोएडा की कंपनी के तीन निदेशकों समेत कुल 63 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अदालत के आदेश पर सेक्टर-63 थाना पुलिस ने शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब दोनों कंपनियों के बीच हुए अनुबंध, बैंक खातों में हुए लेनदेन और कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
63 कर्मचारियों के भुगतान की जिम्मेदारी पर हुआ था समझौता
लखनऊ स्थित सीडीएन वैष्णो इंटरनेशनल कंपनी विभिन्न सरकारी और निजी कार्यालयों में अनुबंध के आधार पर मैनपावर उपलब्ध कराने का काम करती है। कंपनी के प्रतिनिधि नरेंद्र कुमार के मुताबिक, दिसंबर 2023 में उनकी मुलाकात नोएडा के सेक्टर-63 स्थित जी-ब्लॉक की आरव इंटरनेशनल कंपनी के निदेशकों सौरभ शर्मा, रणजीत सिंह और लवकुश मित्तल से हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों कंपनियों के बीच 63 कर्मचारियों के वेतन भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर सहमति बनी। इसके बाद 29 मार्च 2024 को दोनों कंपनियों के बीच एक साल का अनुबंध किया गया। समझौते के तहत कर्मचारियों के वेतन भुगतान से संबंधित व्यवस्था आरव इंटरनेशनल को संभालनी थी।
30 अप्रैल को ट्रांसफर किए 32 लाख रुपये
शिकायत के अनुसार, अनुबंध के तहत सीडीएन वैष्णो इंटरनेशनल ने 30 अप्रैल 2024 को कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन भुगतान करने के लिए आरव इंटरनेशनल को 32 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। कंपनी का आरोप है कि रकम मिलने के बावजूद आरव इंटरनेशनल प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारियों के खातों में वेतन का भुगतान नहीं किया। इसके बाद लखनऊ की कंपनी ने कई बार रकम के भुगतान और हिसाब-किताब को लेकर संपर्क किया, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ। शिकायतकर्ता का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन के लिए दी गई रकम का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया और न ही उसे वापस किया गया।
तीन निदेशकों समेत 63 लोगों को बनाया आरोपी
लखनऊ की कंपनी ने इस मामले में आरव इंटरनेशनल के निदेशकों सौरभ शर्मा, रणजीत सिंह और लवकुश मित्तल समेत कुल 63 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए दी गई रकम का हिसाब नहीं दिया गया। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर कंपनी की ओर से अदालत का रुख किया गया। अदालत के आदेश के बाद सेक्टर-63 थाना पुलिस ने शुक्रवार को सभी 63 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।
बैंक लेनदेन और अनुबंध की जांच में जुटी पुलिस
एसीपी दीक्षा सिंह ने बताया कि अदालत के आदेश पर 63 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। जांच में दोनों कंपनियों के बीच हुए अनुबंध, 32 लाख रुपये के बैंक ट्रांसफर, कर्मचारियों की सूची और उनके खातों में वास्तविक भुगतान की स्थिति की पड़ताल की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि रकम किस खाते में भेजी गई और उसके बाद उसका इस्तेमाल कहां किया गया। साथ ही, नामजद आरोपियों की भूमिका और कर्मचारियों के वेतन भुगतान से संबंधित जिम्मेदारियों की भी जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
